मोल्डिंग ऑफ रिलीफ का जमीन विवाद जैसे सिविल मामलों में होता है. संविधान के आर्टिकल 142 में इसका उल्लेख है. यदि किसी जमीन पर अलग-अलग पक्षकार अपना-अपना हक होने का दावा करते हैं तो ऐसे में सभी पक्षकारों को ध्यान में रखते हुए मोल्डिंग ऑफ रिलीफ प्रावधान का उपयोग करती है. मतलब यह कि ऐसे मामलों मे यदि कोर्ट किसी पक्षकार के पक्ष में फैसला सुनाता है तो अन्य पक्षकारों के लिए मोल्डिंग ऑफ रिलीफ यानी राहत के लिए कुछ अलग विकल्प दिया जाता है.





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